प्लास्टिक बैग की बढ़ी मांग, बारदाना संकट के बीच

 बंगाल में पटसन की खेती को हुए नुकसान का खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है। 

बिलासपुर- जूट बारदाना की सीमित उपलब्धता के बाद सेकंड हैंड प्लास्टिक बैग में इस समय शक्कर,आटा,मैदा और पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले बैग की मांग निकल आई है। भार वहन क्षमता में 50 किलो ग्राम की क्षमता वाले शक्कर, मैदा और आटा के प्लास्टिक बैग 13 से 15 रुपये प्रति नग की दर पर बिक रहा है। नए नियम के पहले तक इनकी बिक्री नौ से 10 रुपये प्रति नग की दर पर की जा रही थी। पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले बैग की कीमत भी 13 से 14 रुपये प्रति नग है। बारदाना बाजार में नए बारदाने की उपलब्धता मांग से कुछ कम है लेकिन धान के साथ बारदाना की भी खरीदी के नियम के बाद नए जूट बारदाना का बाजार लगभग टूट चुका है। इसलिए सेकेंड हैंड जूट बैग की उपलब्धता यह बाजार बढ़ा चुका है। खरीदी की राह में सिर्फ एक बाधा बन रही है, वह है प्लास्टिक बैग की तुलना में तीन गुना ज्यादा महंगा होना। पश्चिम बंगाल में पटसन की खेती को हुए नुकसान का खामियाजा देशभर के किसानों को उठाना पड़ रहा है। बंगाल के कारखानों में इतना उत्पादन नहीं है जो देशभर की मांग को पूरी कर सके। जूट बारदाना के विकल्प के रूप में अब प्लास्टिक बैग की मांग तेजी के साथ बढ़ने लगी है। परेशान भी इसे जूट के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं। प्लास्टिक बारदानों के अलावा जूट के पुराने बारदानों की कीमतें भी बढ़ गई है। प्लास्टिक बैग में अनाज के ज्यादा दिन के भंडारण से गुणवत्ता में कमी आने की पूरी आशंका बनी रहती है। वैसे भी अनाज के लिए जूट बैग को ही सही माना गया है। क्योंकि इस तरह के बैग में हवा की मात्रा अनाज तक पहुंचती है जबकि प्लास्टिक बैग में ऐसा नहीं होता। छिद्ररहित होने की वजह से ऐसे पैकिंग में अनाज की गुणवत्ता खराब होने की समस्या तब सामने आएगी जब संग्रहण केंद्रों में रखे जाने के बाद तय सीमा के भीतर उठाव नहीं हो पाएगा।