मिट्टी धंसने से खतरे की आशंका बढ़ी, स्कूल की ओर बढ़ रहा कोयला खदान का डंपिंगयार्ड

 

 : कोयला उत्खनन के चलते जैसे खदान के डंप से मिट्टी का ढेर बढ़ रहा है, उससे स्कूल का अस्तित्व खतरे में है

कोरबा- स्कूल निर्माण के पूर्व खदान का संचालन हो रहा है। इसके बावजूद भी सुरक्षा नियम को ताक में रखते हुए निर्माण की स्वीकृति दे दी गई। राष्ट्रीय माध्यमिक अभियान के तहत संचालित नवीन हाईस्कूल के लिए अब तक बाउंड्री वाल की स्वीकृति नहीं मिली है। शहर के ईमलीडुगू संचालित प्रायमरी और हाईस्कूल के लिए मानिकपुर कोयला खदान का डंपिंगयार्ड खतरे का सबब बना हुआ है। खदान से लगातार हो रही कोयला उत्खनन से यार्ड की उंचाई लगातार बढ़ती जा रही है। गौण खनिज के लिए यार्ड की मिट्टी का परिवहन निर्माणी ठेकेदार कर रहे हैं। मिट्टी का धसान कभी भी स्कूल को अपनी चपेट में ले सकता है। अनदेखी किए जाने की वजह से कभी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। कोरोना काल में इन दिनों स्कूल बंद है, लेकिन कोयला उत्खनन के चलते जिस तरह से खदान के डंप से मिट्टी का ढेर बढ़ रहा है, उससे स्कूल का अस्तित्व खतरे में आ गया है। स्कूल में श्रमिक बस्ती के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। बढ़ती असुविधा से शिक्षा विभाग भी बेखबर है। शाला प्रबंध समिति की ओर से प्रशासन के खनिज विभाग को अवगत कराया जा चुका है। इसके बाद भी समस्या निदान को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया है। सबसे अधिक समस्या बारिश के दिनों में रहती है, जब मिट्टी नम होने से उसके धसने का भय रहता है। मिट्टी का ढेर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्कूल भवन को नुकसान होगा। यह समस्या केवल इमलीडूगु के लिए ही नहीं बल्कि खदान के निकट एक अन्य गांव भिलाई खुर्द के लिए भी है। खदान के भीतर कोयला उत्खनन के लिए होने वाले विस्फोट से भवन में दरारें आ चुकी है। भवन को अन्यत्र स्थानांतरित करने की आवश्यकता है।