अनूपपुर से जबलपुर ट्रांसफर नहीं होगा दहेज उत्पीड़न का केस- हाई कोर्ट ने कहा

अनूपपुर में पदस्थ रहने के दौरान याचिकाकर्ता के खिलाफ पुलिस ने दहेज उत्पीड़न का केस पंजीबद्ध किया था।
 जबलपुर- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव व जस्टिस राजीव कुमार दुबे की युगलपीठ के समक्ष मामला सुनवाई के लिए लगा। इस दौरान याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी बैंक कर्मी की ओर से अधिवक्ता मनीष शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अनूपपुर में पदस्थ रहने के दौरान याचिकाकर्ता के खिलाफ पुलिस ने दहेज उत्पीड़न का केस पंजीबद्ध किया था। मामला कोर्ट में विचाराधीन है, जहां पुलिस की ओर से आरोप पत्र पेश कर दिया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से जानकारी दी गई कि दहेज उत्पीडन का केस दर्ज होने के बाद किया गया निलंबन समाप्त किया जा चुका है। इसी के साथ याचिकाकर्ता को जबलपुर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसीलिए अनूपपुर में चल रहा मामला जबलपुर स्थानांतरित किए जाने पर बल दिया गया है। कोविड-19 के खतरे के बीच जबलपुर से अनूपपुर जाकर ट्रायल में सहयोग कठिन होगा। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक याचिका इस सवाल के साथ खारिज कर दी कि जब जबलपुर में नौकरी करने जाने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है, तो फिर ट्रायल के लिए अनूपपुर जाने में क्या परेशानी है? चूंकि दहेज उत्पीड़न का केस अनूपपुर से जबलपुर ट्रांसफर करने की मांग बेमानी है, इसलिए याचिकाकर्ता की याचिका खारिज की जाती है।  इस दलील के विरोध में राज्य की ओर से तर्क दिया गया कि जब याचिकाकर्ता कोविड-19 के संकट के बीच जबलपुर में नौकरी कर सकता है, तो फिर ट्रायल के लिए अनूपपुर आने में क्या परेशानी होगी? इस तर्क को सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ किया कि इस तरह बहानेबाजी करके राहत की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। कोर्ट किसी की निजी सुविधा से कार्य नहीं करती। जब तक प्रकरण विचाराधीन है, तब तक कोर्ट की पेशी में हाजिरी आवश्यक है। दहेज उत्पीड़न से पूर्व नौकरी में परेशानी की बात नहीं सोची तो अब केस ट्रांसफर कराने की मांग क्यों?