5 शिकारी गिरफ्तार, श्योपुर में चंबल नदी के रामेश्वर घाट पर जलीय जीवों को पकड़ रहे
श्योपुर- राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के गेमरेंज ऑफिसर आरआर अटल के मुताबिक टीम देखकर शिकारियों ने ट्यूब के सहारे राजस्थान की सीमा में तैरकर भागने का प्रयास किया, लेकिन टीम के सदस्यों ने नदी में घुसकर पांचों को लोगों को पकड़ लिया। पूछताछ में शिकारियों ने अपने नाम 33 वर्षीय मृंत्युजय विश्वास पुत्र सुनील विश्वास, 30 वर्षीय सुब्रत हलधर पुत्र सुखलाल हलधर, 38 वर्षीय मुनेश गजन पुत्र मोहन गजन, 52 वर्षीय आफतीन विश्वास पुत्र नारायण विश्वास और 40 वर्षीय वासुदेव राय पुत्र महेन्द्र राय सभी निवासी नेहरूपुरा तहसील किशनगंज जिला बारां राजस्थान बताया। टीम ने शिकारियों से मछली-कछुआ पकड़ने वाले 700 जाल, 5 ट्यूब, 25 डोर, छोटी मछली पकड़ने वाले 10 डोर, कछुआ और बड़ी मछली पकड़ने के लिए छोटी मछली (मछली चारा) के अलावा चाकू और रोजमर्रा में उपयोग होने वाला सामान जब्त किया हैं। गेमरेंज ऑफिसर अटल के मुताबिक गिरोह के सदस्य मूल रूप से पश्चिम बंगाल से रहने वाले हैं। राजस्थान के बारां में इन लोगों की पूरी बस्ती बसी हुई है। यह लोग चंबल से मछली और कछुआ पकड़कर सोई क्षेत्र के सिराज खान और राजस्थान में ठेकेदारों को बेचते हैं। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अनुसार कछुओं की तस्करी में दो से सात साल तक की सजा का प्रावधान है। गेमरेंज ऑफिसर अटल के मुताबिक चंबल नदी में दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के अलावा, डॉल्फिन, मगरमच्छ और घड़ियाल भी हैं। चंबल नदी में मोरपंखी, साल, सुंदरी, कटहेवा, पचेड़ा, तिलकधारी कछुआ, इंडियन स्टार, धमोक, चौड़ आदि कछुआ की प्रजाति हैं। अटल का कहना है, कि पकड़े गए शिकारी अंतर्राज्यीय गिरोह से संबंध रखते हैं। शिकारियों से पूछताछ की जा रही है। अटल के मुताबिक पश्चिम बंगाल और चीन में लोग कई तरह के पूजा-पाठ और भविष्यवाणी के लिए कछुओं की खाल का इस्तेमाल लंबे अरसे से करते आए हैं। यह परंपरा 1,000 ईसा पूर्व यानी शाग काल से चली आ रही है। कछुए की खाल के जरिए भविष्य बताने की कला को कि बोकू कहा जाता है। इसमें कछुए के खोल को गर्म करके उस पर पड़ने वाली दरारों और धारियों को पढ़कर भविष्य जाना जाता है। भारत में भी दीपावली और अन्य अवसरों पर कछुओं का उपयोग तंत्र-मंत्र में किया जाता है। वास्तुशास्त्र में कछुए को घर में रखने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इससे घर में सुख समृद्धि आती है। यही वजह है कि इसकी तस्करी लगातार बढ़ रही है। चंबल के आस-पास बड़े कछुओं के साथ घर में रखे जाने योग्य छोटे कछुए भी पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह कछुए जियोटलिनिस जीनस प्रजाति के थे और इनका उपयोग एक्वेरियम के साथ ही यौन वर्धक दवाओं में भी किया जाता है। गुरुवार सुबह रामेश्वरधाम पर चंबल नदी में पांच शिकारियों को मछली और कछुआ पकड़ते हुए पकड़ा है। यह अंतर्राज्यीय गिरोह है। सदस्य पश्चिम बंगाल के हैं, जो बारां जिले में रह रहे थे। इनके खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य टीम ने मानपुर थाना क्षेत्र के रामेश्वर धाम घाट पर चंबल नदी में जलीय जीवों को पकड़ रहे अंतर्राज्यीय गिरोह के 5 शिकारियों को पकड़ा है। टीम ने शिकारियों से कछुआ और मछली पकड़ने वाले 700 जाल (दुबड़ी), 25 डोरी छोटी मछली पकड़ने, पांच ट्यूब और करीब 700 छोटी मछली (चारा) को जब्त किया है। यह कार्रवाई गुरुवार सुबह करीब 6.30 बजे की है। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के गेमरेंज ऑफिसर आरआर अटल के मुताबिक जिले में इन दिनों चंबल और पार्वती नदी से रेत निकालना प्रतिबंधित हैं, लेकिन कुछ लोग रात के अंधेरे में इन नदियों से रेत निकाल रहे हैं। ऐसे में नदियों में रहने वाले घड़ियाल, मगरमच्छ सहित अन्य जलीय जीवों को नुकसान पहुंच रहा है। इसी के चलते बुधवार रात करीब 10 बजे वह धर्मसिंहसिंह गुर्जर, दिनेश शर्मा, राजकुमार दादौरिया, मोनू डंडौतिया, उपेंद्र धाकड़, बनवारी, सोवरन धाकड़, वनपाल अर्जुनलाल धाकड़, राहुल सिकरवार, एएसएफ से यदुवीरसिंह, शिववीरसिंह के साथ चंबल अभयारण्य में पर गश्त करने आए थे। सुबह करीब 6.30 बजे जब वह मानपुर क्षेत्र के रामेश्वर त्रिवेणी संगम घाट पर पहुंचे तो कुछ लोग चंबल नदी में शिकार करते दिखाई दिए।