सम्मान का हकदार है - संगीत सूर्य बैजू बावरा* 





   जब हम जाने-माने लोक गायक, भारतीय लोक संस्कृति विरासत के प्रबल पक्षधर संगीत सूर्य बैजू बावरा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर एक सरसरी निगाह डालते हैं तो यह बात कांच की तरह साफ होती है कि मध्यकालीन बैजू बावरा ने मात्र राजा रजवाड़ों के संरक्षण में रहकर उनकी यशोगाथा नहीं की है, उनकी झूठी सच्ची प्रशंसा न करते हुए सही मायने में बैजू बावरा ने भारतीय लोक संस्कृति की अभूतपूर्व अतुलनीय सेवा की है। उसके द्वारा भारतीय लोक संस्कृति एवं साहित्य में प्रदतयोगदान को कभी भी किसी भी स्तर पर भुलाया नहीं जा सकता    क्योंकि लोक गायक बैजू बावरा ने गायन एवं स्वयं द्वारा रचित रचनाओं के माध्यम से साथ ही ध्रुपदों की लोक भाषा और देसी संगीत की स्वर लहरियों के द्वारा बुंदेली ही नहीं तत्कालीन काल और एक पक्षीय परिस्थितियों का आमना सामना करते हुए भारतीय संस्कृति को बचाते हुए क्षेत्रीय लोक संस्कृति की बहुमूल्य पूजा की है। संगीत सम्राट बैजू बावरा द्वारा भारतीय संगीत में प्रदत्त योगदान के कारण ही आज भी वह मध्यकालीन भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में अपना नाम प्रमुखता से दर्ज कराए हुए हैं।

 

       यह सर्वमान्य तथ्य है कि सब दूर विख्यात महान संगीतज्ञ तानसेन और बैजू बावरा एक ही गुरु हरिदास के शिष्य थे। दोनों ने संगीत के क्षेत्र में अपनी अपनी लगन मेहनत के बल पर ऊंचाइयों को छू कर भारतीय जनमानस के दिलों में अमिट स्थान बनाया और ऐसा स्थान बनाया की सदियां गुजरने के बाद आज भी वह कला प्रेमियों के लिए सम्मानीय आदर्श बने हुए हैं। दोनों के विषय में भारतीय संगीत साहित्य खुलकर विस्तृत विवरण, विश्लेषण, विवेचना, आलोचना, एवं समालोचना से भरा पड़ा है।

 

          आशय यह है कि बैजू बावरा कोई काल्पनिक कथानक अथवा नाटक का काल्पनिक पात्र ना होकर जीता जागता एक महान संगीतज्ञ था जिसका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक नगर चंदेरी से जन्म जन्म का नाता है। यह बात और है कि मध्यप्रदेश शासन का संरक्षण पाकर तानसेन सम्मान का पात्र बन गया विपरीत इसके बैजू बावरा मध्य प्रदेश शासन के उपेक्षित रवैया का समय-समय पर शिकार होते हुए भी भारतीय जनमानस की यादों में जीवंत बना हुआ है।

 

        दिलचस्प पहलू देखें ऐसा भी नहीं है कि मध्यप्रदेश शासन बैजू बावरा के अस्तित्व को स्वीकार ना करता हो बारंबार मान्यता प्रदान करता समझ आता है तभी तो एक बार नहीं, दो बार नहीं, कई बार बैजू बावरा के नाम पर चंदेरी में विशाल संगीत समारोह आयोजित कर चुका है। इस साल जनवरी में ही मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग  उस्ताद अलाउद्दीन ख़ां संगीत एवं कला अकादमी भोपाल द्वारा तीन दिवसीय बैजू बावरा संगीत समारोह का सफल आयोजन करना एक उदाहरण है।

 

       इधर स्थानीय किला पहाड़ी पर मौजूद *बैजू बावरा स्मारक* संगीत प्रेमियों के लिए तीर्थ बना हुआ है। जहां पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कैलाश खेर, अनूप जलोटा, पदम श्री से सम्मानित गुन्देचा बंधु, पंडित उमाकांत गुन्देचा, पंडित रमाकांत गुन्देचा, ध्रुपद गायक जिया फरीदउद्दीन डागर, बांसुरी वादक ओम प्रकाश चौरसिया, वीणा वादक उस्ताद बहाउद्दीन डागर, गायक संजीव झा, मनीष कुमार बिहार बंधु जैसे एक नहीं अनेक नामचीन फनकार अपना सिर झुका चुके हैं। यह कभी न रुकने वाला सिलसिला है दिन प्रतिदिन नगर में आ रहे देशी-विदेशी पर्यटक बैजू बावरा स्मारक से रूबरू होते हुए उन्हें नमन करते हैं।

 

         हमें यह जानकर किंचित मात्र भी दुःख नहीं है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा प्रतिवर्ष संगीत कला की विभूतियों के नाम से स्थापित विभिन्न अलंकरण जैसे कालिदास सम्मान, तानसेन सम्मान, कुमार गंधर्व सम्मान, लता मंगेशकर सम्मान, किशोर कुमार सम्मान आदि की स्थापना कर कला क्षेत्र में कार्यरत उच्चतर योगदान कर्ताओं को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाता है। सही है ऐसा किया भी जाना चाहिए ताकि अलंकरण के माध्यम से उनका नाम अमर रहे साथ ही वह वर्तमान समाज के सामने आदर्श रूप में आगामी पीढ़ी को प्रेरणा का सबब बने रहे। संगीत साहित्य कला क्षेत्र में शासन द्वारा की जा रही उक्त पहल सराहनीय कार्य है।

 

       अब तो शासन मंशा अनुसार उक्त सम्मान उनकेे नाम से जुड़े हुए मनिषियों के जन्म स्थान, गृह नगर में ही आयोजन कर प्रदान किए जा रहे हैं। ताकि कला के पुजारी नई पहचान पा सकें साथ ही साथ उन महारथियों के नगर का नाम भी रोशन हो सकें यानि एक पंथ दो काज वाली कहावत चरितार्थ होगी।

 

       इस स्तर पर दुःख हमारा यह झलकता है कि तानसेन के समकालीन सौ फीसदी सम्मान का हकदार संगीत सूर्य बैजू बावरा के साथ शासन द्वारा अन्याय क्यों ? जब शासन नामचीन संगीत हस्तियों को स्मरण कर सम्मान से नबाज रहा है तो क्यों नहीं अभी तक शासन द्वारा *बैजू बावरा सम्मान* की स्थापना की गई ? क्यों बैजू बावरा के प्रति दोहरी नीति अपनाई जा रही है ? क्या बैजू बाबरा आज भी मध्य कालीन मानसिकता का बोझ ढ़ो रहा है ? 

 

        यदि नहीं तो अब और अधिक देर न करते हुए बैजू बावरा की याद को चिरस्थाई रखने हेतु मध्यप्रदेश शासन द्वारा *बैजू बाबरा सम्मान* की स्थापना करना कला प्रेमियों विरासत चंदेरी की मौन किंतु पुरजोर ठोस मांग है ताकि सदियों से समय की मार का सताया हुआ उपेक्षित बैजू बाबरा पर हो रहे अन्याय पर विराम लग सके उसे उसका बाजिव हक मिल सके जिसका वह पूर्णरूपेण हकदार है।

 

चंदेरी पर्यटन को फायदा

 

              शासन द्वारा चंदेरी लोक संस्कृति विरासत का प्रतिनिधित्व करते बैजू बावरा के नाम पर *बैजू बावरा सम्मान* की स्थापना उपरांत प्रति वर्ष चंदेरी में बैजू बावरा संगीत समारोह का आयोजन कर चयनित आदरणीय सम्मानीय जन संगीतज्ञ को सम्मानित एवं पुरस्कृत करने से बैजू बावरा के मान सम्मान के साथ चंदेरी पर्यटन में वृद्धि के अलावा टैक्सटाइल्स टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा जिसका असर चंदेरी साड़ी क्रय विक्रय क्षेत्र में परिलक्षित होगा।

 

निवेदन

 

         अतएव आदरणीय पर्यटन मंत्री महोदय मध्य प्रदेश शासन भोपाल, श्रीमान प्रमुख सचिव महोदय पर्यटन विभाग भोपाल, श्रीमान संचालक महोदय संस्कृति विभाग भोपाल, श्रीमान जिलाधीश महोदय अशोकनगर एवं श्रीमान अनुविभागीय अधिकारी महोदय चंदेरी को पत्र प्रेषित कर उक्त संबंध में कार्यवाही हेतु निवेदन किया गया है।

 

 

                   लेखक 

         मजीद खां पठान (सदस्य)

       जिला पर्यटन संवर्धन परिषद

             चंदेरी मध्य प्रदेश