पर्यटकों से गुलजार रहने वाली चंदेरी की किला कोठी को है आपका इंतजार



आओ घूमे अपना देश-सबसे पहले चंदेरी मध्य प्रदेश एक दिन तो गुजारिए चंदेरी में

 



लेखक- मजीद खां पठान (सदस्य) जिला पर्यटन संवर्धन परिषद् चंदेरी मध्य प्रदेश


 


चंदेरी- यूं तो कोरोना वायरस ने अपनी मजबूत बांहों में आज सारी दुनिया को जकड़ लिया है, और कोरोना वायरस का पड़ रहा व्यापक प्रभाव मात्र मानव समाज को नुकसानदेय नहीं है अपितु इसके असर से कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं रह सका है फिर चाहे वह पर्यटन क्षेत्र हो अथवा अन्य। सब दूर कोरोना प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुंचा रहा है। भारतीय पर्यटन क्षेत्र अंतर्गत जहां तक चंदेरी पर्यटन की बात है साफ तौर पर देखा जा रहा है कि वह कोरोना प्रभाव की जबरदस्त गिरफ्त से बाहर निकलते हुए धीरे-धीरे आ रहे पर्यटकों से अतीत की यादें साझा करते हुए और पर्यटकों का इंतजार कर रहा है।

           बीसवीं सदी के प्रथम दशक में सिंधिया रियासत ग्वालियर महाराजा माधौराव सिंधिया के शासन काल में निर्मित सिंधिया कोठी वर्तमान में किला कोठी (होटल म.प्र.पर्यटन) के नाम से सब दूर पहचान स्थापित किए हुए हैं। मूलत: कोठी को किला कोठी क्यों कहा जाता है इसका सीधा-साधा उत्तर यह है कि कोठी  की सुरक्षा दीवार से ही किला परिसर प्रारंभ हो जाता है अतएव स्थानीय आम बोलचाल की भाषा में कोठी को किला कोठी कहा जाने लगा। अच्छी बात यह रही कि मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने भी इसके नाम से कोई छेड़छाड़ ना करते हुए होटल को किला कोठी के ही नाम से प्रचारित किया है। लेकिन यहां पर नाम महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है उसका वर्तमानकालीन उपयोगिता एवं पर्यटन महत्व।

          जगजाहिर है कि सिंधिया सरकार द्वारा उक्त कोठी का निर्माण सिंधिया राजघराना के चंदेरी प्रवास दौरान निवास स्थल के रूप में उपयोग करने हेतु कराया था। जब भी सिंधिया राजघराना का कोई सदस्य अथवा महाराजा ग्वालियर चंदेरी प्रवास पर आते थे इसी कोठी में रात्रि विश्राम किया जाता था। कोठी की वास्तुकला में शिवपुरी स्थित बांकडे कोठी वास्तुकला की कुछ-कुछ झलक दिखाई देती समझ आती है। याद रखना होगा कि शिवपुरी, ग्वालियर सिंधिया रियासत की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी।

            1947 ईस्वी में देश आजादी के बाद 1948 ईस्वी में मध्य भारत राज्य गठन उपरांत किला कोठी सिंधिया रियासत के इतिहास की विषयवस्तु बन कर मध्य भारत राज्य के अतिथियों के आव-भगत में जुट गई। 1956 ईस्वी में मध्य प्रदेश राज्य का गठन हुआ तो यह शानदार खूबसूरत कोठी क्रमश: सिंधिया  रियासत तत्पश्चात मध्य भारत राज्य का दामन छोड़कर म. प्र. शासन की शासकीय संपत्ति के रूप में शासकीय परिपत्रों में दर्ज होकर मध्यप्रदेश शासन लोक निर्माण विभाग के अधीन विश्राम गृह के रूप में संचालित होने लगी। 

       इस कोठी को 1992 ईस्वी में तब अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली जब भारत सरकार द्वारा राजनैतिक शरण प्राप्त श्रीलंका जाफना प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री राजवर्द्धन पेरूमल को सपरिवार इस कोठी में ठहराया गया। जैसे ही इस खबर ने चंदेरी से आगे बढ़ना प्रारंभ किया वैसे ही यह किला कोठी संग चंदेरी, राज्य ही नहीं, राष्ट्रीय ही नहीं अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने लगी। परिंदा पर न मार सकें ऐसी चाक-चौबंद अनेक सुरक्षा चक्र सहित चौबीस घंटे जाबांज सुरक्षा कर्मियों के घेरे में एक साल तक रही किला कोठी तब आजाद हुई जब उक्त विदेशी  मेहमान को सपरिवार किला कोठी चंदेरी से स्थानातंरित कर भारत के किसी अन्य सुरक्षित स्थल पर ठहराया गया।

           विरासत चन्देरी के प्रति हमेशा संवेदनशील रवैया अपनाने वाले तत्कालीन क्षेत्रीय सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सफल प्रयासों के फलस्वरूप कोठी का जीर्णोद्धार कार्य क्रमश: 2005 ईस्वी में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (भारत सरकार) द्वारा एवं 2008-09 ईस्वी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भारत सरकार) इकाई चन्देरी द्वारा किया गया। मात्र वरिष्ठ एवं वरिष्ठतम अधिकारियों एवं शासन में नुमाइंदगी करते जनप्रतिनिधियों के लिए विश्राम गृह के रूप में संलग्न रही यह किला कोठी, चंदेरी पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2016 ईस्वी में म. प्र. शासन आदेशानुसार लोक निर्माण विभाग को खुशी-खुशी अलविदा कहकर मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम का हाथ थामकर एवं भारतीय पुरातन संस्कृति *अतिथि देवो भव:* भावना को अंगीकार कर *हेरिटेज होटल* के रूप में परिवर्तित होने हेतु सजने संवरने लगी।

          मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा किला कोठी के प्राचीन स्वरूप को यथावत सम्मान देते हुए परिसर में दो नवीन कक्ष सहित होटल की आवश्यकतानुसार निवास, रेस्टोरेंट, सुख सुविधाएं नई साज-सज्जा सहित उपलब्ध कराते हुए फरवरी 2018 ईस्वी में आइए आपका स्वागत है भावना से लबरेज होकर देशी-विदेशी पर्यटकों के समक्ष उपस्थित हुई। 

          नाम के अनुरूप मेहमान को ऐतिहासिकता का  अनुभव कराने का संकल्प लिए किला कोठी की नई पारी की शुरुआत जबरदस्त जानदार शानदार रही जब होटल किला कोठी में प्रथम यात्री के रूप में *फिल्म अभिनेता* *वरुण धवन* एवं भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी विराट कोहली की पत्नि एवं मशहूर फिल्म *अभिनेत्री अनुष्का शर्मा* का धमाकेदार आगमन हुआ। जिन्होंने लगातार एक माह तक इस कोठी  में ठहर कर नगर के विभिन्न हिस्सों में फीचर फिल्म *सुई धागा* की शूटिंग को अंजाम दिया। तब यह किला कोठी मय वालीवुड संपूर्ण भारत सहित विदेशों में सुर्खियां बटोर रही थी। वातानुकूलित छै: कक्ष एवं रेस्टोरेंट सहित अधिकतर हाउसफुल होकर नगर में पर्यटकों की पसंद अब्बल दर्जे में शुमार  है। 

            इस हेरिटेज होटल की खासियत यह है कि एक तो यह पहाड़ी के ऊपर स्थित है दूसरे दो मंजिल का होना, तीसरा प्रदूषण रहित शांत वातावरण हरा भरा जंगल निकट प्राचीन किला का स्थापित होना इन सब से हट कर किला कोठी  के प्रथम एवं द्वितीय तल के बरामदा में बैठकर नीचे बसे नगर एवं सामने दिखाई देती ऊंची-नीची पहाड़ियां, जल-जंगल को निहारना किसी भी पर्यटक की झील जैसी आंखों में ही नहीं वरन दिलो-दिमाग को भी असीम सुख का अनुभव कराती हुई यह कहने को विवश कर देती है कि *वाह क्या सीन है।* अभी मात्र दो साल के काल क्रम में अच्छा-खासा आर्थिक लाभ कमा कर निगम के खजाना में जमा करते हुए चंदेरी की पहचान में बढ़ौत्री कर रही इस हेरिटेज होटल पर भारत में दस्तक दे चुका कोरोना वायरस ने अपना असर दिखाया और  दिन-रात पर्यटकों से गुलजार रहने वाली कोठी लाकडाउन के कारण मार्च के अंतिम सप्ताह से जून के प्रथम सप्ताह तक सन्नाटा से सामना करती रही।

             यह सच है कि होटल बंद होने से म. प्र. शासन को आर्थिक नुकसान हुआ है। यह भी सच है कि कोरोना वायरस की रोकथाम के चलते होटल को म. प्र. शासन द्वारा बंद किया गया  और यह भी उतना ही सच है कि *जान है तो जहान है* अस्तु शासन द्वारा उठाया गया कदम जनहित में है। लेकिन आज देश प्रदेश की परिस्थितियां तेजी से बदली है। अब हम सबको कोरोना से भी बचना है तो देश को भी आगे बढ़ाना है। 

          इसलिए ही केंद्रीय-राज्य सरकार की अब साफ-शुद्ध खुली मंशा है कि लाकडाउन के कारण देश प्रदेश की ठप्प हो चुकी अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे पटरी पर लाया जावें इस हेतु सावधानी सर्तकता बरतते हुए विभिन्न क्षेत्रों में बंद पड़े संस्थानों को खोलने की इजाजत दी जा जा चुकी है। ऐसी परिस्थितियों में म. प्र. पर्यटन के होटल शासन द्वारा जारी  गाइडलाइन का पालन करते हुए आठ जून से प्रारंभ हो चुके है। लेकिन अभी वह बात नहीं है जो लॉकडाउन के पूर्व हुआ करती थी। विश्वास है कि धीरे-धीरे सब सामान्य होगा पर्यटन भी और देश भी वैसे ही आगे बढ़ेगा जैसा कि पूर्व में रफ्तार हासिल किए हुए था।

      आइए हम सब मिलकर कोरोना के विरुद्ध रोकथाम हेतु भारत सरकार, मध्यप्रदेश शासन, जिला एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी एडवाइजरी का पालन कर नगर हित, राष्ट्र हित में अपना संपूर्ण योगदान देकर एक अच्छे जागरूक भारतीय नागरिक होने का परिचय देते हुए पर्यटन के प्रति पूर्व रुचि को जागृत करें।