सभी अभिभावकों से अनुरोध है कि अपने बच्चों में भेदभाव ना करते हुए उन्हें समान अवसर दें पढ़ने का और बढ़ने का। बहू लाइए तो उसके साथ वैसा ही व्यवहार कीजिये जो आप अपनी बेटी के लिए उसकी ससुराल वालों से चाहते हैं।
इस दिवस के मौके पर सभी बहनों और बेटियों से मैं बस यही कहना चाहता हूँ कि अपनी अहमियत समझिये और समाज में खुद को स्थापित करिये। यूँ ही घुटने टेकती रहेंगी तो कोई आपको उठने ही नहीं देगा। पुरुष वर्ग आपके दुश्मन नहीं हैं उनसे लड़ने की बजाय, उनका विरोध करने की बजाय साथ चलना सीखिये। क्योंकि दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। पत्नी बनें तो सहचरी बनें, बहू बनें तो अपने से बड़ों का सम्मान करें, माँ बने तो अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें। अपनी गरिमा के साथ और आत्मविश्वास के साथ अपनी क्षमता का उपयोग करें और अपनी नजरों में, अपने माता-पिता की नजरों में, अपने पति की नजरों में और अपने बच्चों की नजरों में सम्मान पाएं।
मैं दूसरे पहलू पर अगर बात करूँ तो
सरकार की तरफ से हर साल महिला दिवस पर बड़े-बड़े से विज्ञापन जारी किए जाते हैं और हमेशा इस दिन नई -नई योजनाएं व घोषणाएं तक की जाती हैं।
वहीं समाचार पेपरो में कहीं पांच साल की मासूम बच्ची तो कहीं सात साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की शर्मनाक वारदात देखने को मिल रही हैं, हर साल यूहीं कागजों में, समारोहों में, फोटों में महिला दिवस मनता रहेगा, और यूं ही मासूम बच्चियों के साथ हैवानियत होती रहेगी, सारी योजनाएं व घोषणाएं कागजों में ही धरी होकर रह जाती हैं।
जब तक दुष्कर्म को लेकर कोई सख्त कानून नहीं बन जाता।
वैसे हमारी सरकार को सांसदों, विधायकों व अधिकारियों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं व लाभ दिये जाने से फुर्सत मिले तब कहीं जाकर मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म पर प्रभावी कानून बन पायेगा ।
क्या मासूम बच्चियो के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपियों को सख्त सजा संबंधित कानून बनाने के लिये इस पर बहस होना जरूरी नहीं है या सिर्फ बाकी मुद्दे ही बहस के योग्य हैं।
ईश्वर नें सृष्टी को दो भागों में विभक्त किया पुरुष को बल प्रधान और नारी को भावप्रधान बनाया ।
आज तक तो हमारे समाज में बल की महत्ता रही है लेकिन धीरे धीरे सभ्य होते होते ताकत की जरुरत कमतर होती जा रही है और भावशक्ति का महत्व दिनों दिन बढ़ता जा रहा है।
यदि पुरुष को जड़ जगत का राजा कहा जाए तो नारी चेतन जगत की रानी है। साथ भी ये भी साफ़ होता जा रहा है कि चेतन जगत की शक्तियां जड़ जगत से कई-कई गुना अधिक है
आज नारी दिनों दिन अपेक्षाकृत अधिक सशक्त होती दीख रही है।
इससे मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूँ कि आने वाला कल नारी प्रधान ही होगा !!
✍️शिशुपाल यदुवंशी (म.प्र.पुलिस )