कोरोना का इस दिन से शुरू होगा खात्मा, ग्रहों के इस योग ने फैलाया कोरोना


आखिर एक वायरस ने कैसे महामारी का रूप ले लिया और कैसे इसके आगोश में एक के बाद एक देश समाते चले गए। ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखें तो कोरोना का प्रकोप धरती पर क्रूर ग्रहों की युति की परिणाम है। ज्योतिष में बृहस्पति को जीवन का कारक ग्रह माना गया है और राहु-केतु को संक्रमण, विषाणु जनित रोग, छिपी बीमारियों का कारक ग्रह माना गया है। ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति के साथ राहु या केतु ग्रह की युति होने पर ऐसे रोग होते हैं, जिनसे निपटना या जिनका इलाज बेहद मुश्किल होता है। इसमें भी केतु क्रूर होने के साथ रहस्यवादी ग्रह है। इसलिए बृहस्पति और केतु के योग से इस तरह के रोग होते हैं। कोरोना वायरस के प्रकोप से दुनियाभर में हाहाकार मचा हुआ है। अभी तक यह वायरस हजारों लोगों की जान ले चुका है, लाखों लोग इसके संक्रमण से पीड़ित हैं और करोड़ों लोग इससे प्रभावित हुए हैं। चीन के वुहान शहर से निकलकर इस वायरस ने विश्व के तमाम देशों को अपने आगोश में ले लिया है। इसकी वजह से कई देशों के करोंड़ों लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। 6 मार्च 2019 को केतु ने धनु राशि में प्रवेश किया था। इसके बाद 4 नवंबर 2019 को बृहस्पति ने धनु राशि में प्रवेश किया था। चीन में पहला केस नवंबर 2019 में सामने आया था। इसके बाद 26 दिसंबर 2019 को साल का आखिरी सूर्यग्रहण पड़ा। सूर्यग्रहण के दिन ग्रहों का षडाष्टक योग बना था। सूर्य, चंद्र, बृहस्पति, शनि, बुध और केतु के योग से सूर्यग्रहण का नकारात्मक प्रभाव पड़ा। इसने कोरोना को महामारी बना दिया। लेकिन इसके बावजूद 29 मार्च को गुरु के मकर राशि में प्रवेश करते ही शनि-मंगल की युति का असर कम हो जाएगा। इस वजह से कोरोना के असर में कमी आएगी। 13 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश से राहत ज्यादा बढ़ जाएगी। 4 मई को मंगल कुंभ राशि में प्रवेश करेगा जो काफी राहतभरा रहेगा। 20 मई को राहु नक्षत्र बदलेगा और कोरोना का असर खत्म होता चला जाएगा। इसके 14 दिन बाद चंद्रग्रहण हुआ। यह भी शुभ फल देने वाला नहीं था और राहु, केतु, शनि से पीड़ित रहा था। ज्योतिष के अनुसार सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति के कमजोर होने पर प्रलय की स्थिति निर्मित होती है। इसके बाद जब केतु मूल नक्षत्र में पहुंचा तो कोरोना ने भयानक रूप धारण कर लिया। 20 सितंबर 2020 तक केतु धनु राशि में रहेंगे। इस वजह से ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। राहु इस समय आद्रा नक्षत्र में है , जो प्रलय का नक्षत्र माना जा रहा है। 20 मई 2020 तक वह इसी आद्रा नक्षत्र में रहेगा। 20 मई 2020 तक बृहस्पति उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा जो परेशानी पैदा करेगा।